शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

पारद हनुमान

पारद हनुमान :-



भगवान हनुमान भगवान शिव के 11 वें अवतार (रुद्र अवतार) माने जाते है, और इन्हे परमेश्वर के बीच सबसे अधिक शक्तिशाली और बुद्धिमानी माना जाता है। भगवान हनुमान की पूजा हमेशा शुद्ध और बेगरज भक्ति के साथ ही की जाती है। हनुमान पवन-पुत्र (पवन के बेटे) और वायु-पुत्र के रूप में जाने जाते है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते है, इसीलिए भगवान हनुमान जी की आराधना करना ही सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि वे संकटमोचन अर्थात संकटों को दूर करने वाले हैं।
   
                                 भगवान हनुमान अपनी भक्ति और शक्ति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। सारे पापों से मुक्त करने और हर तरह से सुख-आनंद एवं शांति प्रदान करने वाले हनुमान जी की उपासना लाभकारी एवं सुगम मानी जाती है। पंडित एन. एम. श्रीमाली जी के अनुसार जीवन में जब भी कोई अत्यधिक मुश्किल प्रतीत हो रही हो या लाख कोशिशों के बाद भी वह पूर्ण नहीं हो पा रही हो या बार-बार बाधाएं उत्पन्न हो रही हों तब हनुमान जी को प्रसन्न कर उन रुकावटों को दूर करना चाहिए। तथा हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र का भी जाप करना चाहिए।


मंत्र :-

        "ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा"


जप विधि :-

इस मंत्र का जप करने के लिए मंगलवार को सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनने चाहिए। उसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करना चाहिए। पंडित एन. एम. श्रीमाली जी के अनुसार इस मंत्र का जप पारद हनुमान प्रतिमा के सामने किया जाये तो विशेष लाभ मिलता है। इसके अलावा इस मंत्र का जप लाल हकीक माला या फिर तुलसी की माला से ही करना चाहिए।





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